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ड्रॉ मुकाबले में फिरकी गेंदबाजों का दिखा जादू, बेहतरीन विकेट के लिए क्यूरेटर को मिला इनाम

कानपुर। पांचवें दिन जैसे ही सूरज अपनी तपिश दिखाई मानों विकेट पर स्पिन गेंदबाजों के लिए जान फूंक दी गई हो। भारत और न्यूजीलैंड के बीच कानपुर में खेले जा रहे टेस्ट मैच के पांचवें दिन लंच के पहले तक मजबूत लग रही कीवी टीम लड़खड़ाने लगी। लेकिन मैच के आखिरी सेशन में न्यूजीलैंड की टीम की ओर से खेल रहे भारतीय मूल के बल्लेबाज मैच बचाने में सफल रही। दरअसल, गंगा नदी का किनारा होने के चलते विकेट पर पहले घंटे नमी रहती है। जिसके चलते तेज गेंदबाज असरदार साबित होतें हैं। जैसा कि पहले व दूसरे दिन देखने को मिला। लेकिन तीसरे दिन के बाद से विकेट स्पिनरों के मुफीद हो जाती है और जैसे-जैसे आसमान पर सूरज चढ़ता है। मैदान पर स्पिन गेंदबाज़ भी हावी होने लगते है। विकेट पर गेंद स्पिन होने के साथ-साथ स्किन होने लगता है। लंच के बाद जैसे ही विकेट टूटना शुरू भारतीय स्पिनरों ने शानदार गेंदबाजी की। लेकिन कीवी टीम की ओर से आई रचिन रवींद्र व एजाज़ पटेल की अंतिम जोड़ी में मैच को ड्रॉ पर रोक दिया।

लंच से पहले एक विकेट खोकर सौ रन का आंकड़ा पार कर चुकी कीवी टीम दूसरे सेशन में भारतीय बल्लेबाजों के सामने स्ट्रगल करती नजर आई। कीवी टीम ने मात्र 46 रन पर अपने चार प्रमुख बल्लेबाजों को खो दिया। इसमें सबसे पहले उमेश यादव ने लंच के बाद पहली ही गेंद पर नाइट वॉचमैन के रूप में आए विल समरविल को चलता किया। इसके बाद अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम की नैया पार लगाने की कोशिश कर रहे टॉम लाथम भी रविचंद्रन अश्विन की बाल पर क्लीन बोल्ड हो गए। लाथम को आउट होता देख कीवी टीम में खलबली मचल गई। दरअसल, 54 वें ओवर की दूसरी गेंद हाफ पिच पर पड़ने के बाद घुटने के नीचे रही और बैट का इनसाइड एज लेते हुए स्टंप को जा लगी। वहीं, सेशन पूरा होने तक टेलर भी जडेजा का शिकार बन गए। यह गेंद भी विकेट पर सामान्य से कम उछला था।

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