इस अवसर पर माननीय श्री सुरेश जी जोशी, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे, अध्यक्ष, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली, डॉ. गिरीश बापट, संचालक, ज्ञान प्रबोधिनी, पुणे एवं श्री कौस्तुभ करमरकर, उपाध्यक्ष, सूर्या फाउंडेशन, नई दिल्ली विशेषरूप से उपस्थित थे।
श्री सुरेश जोशी ने अपने उद्बोधन में भारत के आर्थिक विकास हेतु युवाओं, विशेषकर ग्रामीण परिवेश के आदिवासी युवाओं के कौशल विकास पर बल दिया, ताकि माननीय प्रधानमंत्री के मूल-मंत्र 'सबका साथ सबका विकास' को पूरा किया जा सके। श्री जोशी ने क्रिस्प एवं नर्मदा संस्थान द्वारा कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की।
भारतीय संस्कृति संबंध परिषद् के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को अर्जित करने के लिए कौशल विकास के महत्व पर ज़ोर दिया।
ज्ञान प्रबोधिनी के संचालक डॉ. गिरीश बापट ने कौशल विकास कार्यक्रमों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने का सुझाव दिया, ताकि विद्यार्थी स्कूल से ही कौशल का महत्व जानें।